दसंबर की वो तारीखें और टू टा हुआ आईना: मेरी रूह का एक सफ़र
19 दसंबर 2025।
सिाल खत्म होने को है, ले कन कुछ तारीखें ऐसिी होती हैं जो कैलेंडर सिे तो ह जाती हैं, पर ज़िहन सिे कभी नहीं म तीं। जैसिा क कहा गया है, |
“कुछ तिारीखें बीतितिी हिी निहिीं, ति ा साल गुजरनिे के बाद ी”
आज जब मैं पीछे मुड़कर दे खता हूं, तो एक सिाल और एक महीने का वो लंबा सिन्ना ा याद आता है, जसिे मैंने 5 दसिंबर को अपनी पत्नी के सिाथ हुई ‘मे डएशन’ में ू ते हुए दे खा।
7 निवंबर 2024 से 5 दसंबर 2025 तक का सिफ़र सिफिर्थ सिमय का नहीं, एक रूह के पत्थर होने का सिफ़र था। एक सिाल बाद उसिे दे खा, तो लगा जैसिे वक्त ठहर गया हो। वह वैसिी ही थी जैसिी उम्मीद थी, पर शायद मैं वो नहीं रहा जो एक सिाल पहले था। गा लब ने शायद मेरे जैसिे हालात के लए ही कहा था —
“दे खी हिै दरार आज आईनिे ें ैंनिे, पतिा निहिीं शीशा टू टा था या ैं खुद” ।
शायराना और गहरा तिारीखों के लबे और रूहि की दरारें
धोखा, वफ़ा और वो ‘झूठा’ केस ज़िंदगी में जब हम बना कसिी लालच के, पूरी शद्दत और सिच्चे प्यार के सिाथ अपना सिब कुछ कसिी पर न्योछावर कर दे ते हैं, तो बदले में ‘धोखे’ की उम्मीद कभी नहीं होती। ताज्जुब होता है क इसि उम्र में, जहाँ हमें सिाथ मलकर सिपने बुनने थे, वहां आज हम अदालतों के चक्कर का रहे हैं।
उसि इंसिान के सिाथ जसिे कभी ‘हमसिफ़र’ माना था, आज उसिी के सिामने एक ‘केसि’ की फिाइल बनकर खड़ा हूँ। राहत इंदौरी सिाहब का वो शेर याद आता है —
“उदास हिै तिो उदासी ें ुस्कुरानिा या, पहिनि के झूठी हिंसी हि फलों ें जानिा या” ।
पर हकीकत तो यह है क “अपनिे चेहिरे पर ुस्कुराहिट रखकर आईनिे को हि ेशा गु राहि रखा” ।
The Battle Between Mind and Heart I knew this was coming. I prepared myself.
मैंने खुद को मान सक रूप से तैयार कया था क चुनौ तयां आएंगी, मु कलें बढ़ें गी। दमाग तो सिंभल गया, पर दल कहीं पीछे छू गया।
It’s a classic conflict: “Dimag to sambhal gaya, magar dil kho gaya.”
आज हालत यह है क जसि वफ़ा के लए मैंने दु नया छोड़ी थी, उसिी वफ़ा ने आज मुझे बेगाना कर दया। तहजीब हाफिी के लफ्जों में कहें तो —
“बगैर उसको बतिाए नि ानिा पड़तिा हिै, यहि इश्क राज हिै इसको छु पानिा पड़तिा हिै” ।
पर जब र ता अदालत की चौख तक पहुँच जाए, तो कैसिा राज और कैसिी वफ़ा? आज ददर्थ इतना गहरा है क
“ जंदगी निे इतिनिे ददर्म दए क अब पत्थर तिो निहिीं, पर ो ी निहिीं रहिा ैं” ।
मट्टी से जिुड़ाव और आने वाला कल इन तमाम चुनौ तयों के बीच, मैं खुद को ू ने नहीं दूं गा। यह सिच है क “ लनि का सफर पल र ें बबार्मद हिो गया जब उसनिे कहिा, ‘कहिो कैसे आनिा हुआ’” , ले कन मैं यह भी जानता हूँ क इंसिान तभी खलता है जब वह अपनी मट्टी और सिच्चाई सिे जुड़ा हो ।
Life is tough right now, and as the saying goes, “मजबूर इतने हुए क सा हलि ने डिु बो दया”, पर यह अंत नहीं है।
ये तारीखें, ये मे डिएशन के चक्कर और ये अकेलापन — सिब एक दन यादों के झरोखे में बंद हो जाएंगे।
ैं आज ी ुस्कुरा रहिा हूँ, यों क दु निया को यहि पतिा नि चले क “इतिनिा ददर्म सहिनिे के बाद ी कोई कैसे ुस्कुरा सकतिा हिै” ।
जिब जिमीन खसक गई: वो मे डिएशन और झूठे इल्जिाम पछले सिाल 7 नवंबर के बाद जब 5 दसिंबर को उसिे पहली बार मे डएशन में दे खा, तो लगा था क शायद इंसिा नयत अब भी बाकी होगी। ले कन जब उसिका स् े में पढ़ा, तो पैरों तले सिे जमीन खसिक गई।
“Phle mediation par hi jab uska statement padha to dharti sarak gaee meri.” उसिमें सिफिर्थ झूठे इल्जाम नहीं थे, ब ल्क मुझे “MENTALLY UNSTABLE” तक लख दया गया था।
कतना अजीब है न? मुझे लगा था क मैं ‘ दल सिे पागल’ हूँ उसिके प्यार में, और उसिने मुझे ‘ दमाग सिे बीमार’ सिा बत कर दया। शायद इसिी लए मैंने दूसिरा मे डएशन स्कप कर दया। कभी सिोचा न था क एक Love Marriage का अंजाम ये होगा।
जुदा होना एक अलग बात थी, पर इसि कदर बबार्थद करने पर उतर आना — “Isne to meri rooh ko kapa diya.” अब शायद इंसिान और उसिकी इंसिा नयत सिे ही कभी मेरा कोई र ता नहीं जुड़ पाएगा। जॉन ए लया याद आते हैं:
“अब नहीं कोई बात खतरे की, अब सभी को सभी से खतरा है।”
खामो शयाँ और चीखें:
Sheevum Goel के आकार्मइव से…
एक ऐसी दास्तिां जो शायद आज अधूरी हिै, पर एक दनि ुकम् ल ज़रूर हिोगी।
